अरमान

आदित्य अवस्थी कुछ अपने तरीके से अपनी शर्तों पर और कुछ अलग ढंग से जीवन जीने में विश्वास रखते थे । बहुत कम उम्र में वे इंग्लैंड चले गए थे। अपने बलबूते पर अच्छा धन कमाया और अपने व्यापार को सफलता की चरम सीमा तक ले गए। उन्हें आदित्य नाम से अधिक प्रिय ऐडी था क्योंकि वे इसी नाम से इंग्लैंड में मशहूर थे। वे साल में एक बार भारत ज़रूर आते थे। यहाँ का सोशल लाइफ उन्हें बहुत भाता था। मुंबई उनका पसंदीदा शहर रहा है। वे इसे ‘ हैपनिंग सिटी ‘ कहते थे।
लंबे समय तक इंग्लैंड में रहने के कारण उन्हें गर्मी में हाफ़शर्ट और सर्दियों में कोट टाई पहनने की आदत थी। यद्यपि मुंबई के अन्य निवासियों को शायद ही कभी कोट पहनने की ज़रूरत महसूस होती होगी पर ऐडी को यही लिबास पसंद था। एक और खासियत थी,वे मुँह में हमेशा पाईप रखते थे। गोल भारी चेहरा, ओठों पर मुस्कान , चौड़ी छाती,सिर पर घने कच्चे – पके बाल और गेहुँआ वर्ण। कुल मिलाकर आकर्षक व्यक्तित्व , सुपुरुष व्यक्ति।
क्लब में आनेवाली ‘ सो कॉल्ड मॉडर्न ‘ महिलाएँ उनसे घनिष्ठता बढ़ाने की ताक में रहतीं और ‘ ऐडी डार्लिंग ,’ कहकर कई महिलाएँ उन्हें संबोधित भी करतीं। ऐडी मुस्करा देते और पाइप से धुआँ छोड़ते मानो उन्हें हवा में उड़ा दिया हो। अमीर और आकर्षक व्यक्ति को  सभी ज्यादा चाहते हैं। पर ऐडी की पारखी नज़रें थीं वे किसी को पास फटकने भी नहीं देते थे।
ताश और बिलिएड्स के आला शौक़ीन थे। लॉन्ग ड्राइव भी बहुत पसंद करते थे अगर कुछ नापसंद था तो वह थी बारिश। तीस – पैंतीस वर्ष इंग्लैंड में रहकर वे बारिश और भयंकर शीत से नफ़रत करते थे। मुंबई शहर शायद इसीलिए उन्हें अधिक भाया और बावन साल की उम्र में अपना सारा बिज़नेस वाइंड आप करके वे यहीं आकर बस गए। धन की कोई कमी न थी। एक पॉश लोकैलिटी में बढ़िया घर लिया , सारी सुख-सुविधाएँ जुटाई और फुल्ली रिटायर्ड मैन की खुशहाल जिंदगी गुजारने लगे। यहाँ यह कहना भी जरूरी है कि वे एक हैंडसम बैचेलर भी थे। नैन्सी बॉम्बे क्लब की देखरेख किया करती थी। आकर्षक व्यक्तित्व,शालीन व्यवहार, मृदुभाषी महिला । उसकी एक खासियत थी कि वह हमेशा लंबे ड्रेस पहना करती थी। यद् यपि क्लब में काम करती थी पर कपड़े ऐसे होते जिससे शरीर का कोई हिस्सा कहीं से भी झाँकता हुआ न दिखता। क्लब में सबके साथ उसके संबंध बहुत अच्छे थे जिस कारण कई मर्द उसके दीवाने भी थे। चालीस के क़रीब उसकी उम्र थी , सामाजिक उसूलों को निभाने के साथ – साथ अपनी मर्यादा में रहना जानती थी। कुछ मनचले मर्द थे जो नैन्सी का स्पर्श और शायद एकाध रात उसके साथ गुज़ारने की ख्वाहिश रखते थे। पर उसने भी कच्ची गोलियाँ नहीं खेली थीं , वह उन्हें खूब टालना जानती थी। चूँकि वह क्लब में काम करती थी तो लोगों को लगता था वह एवेलेबल औरत है। पर यह मर्दों की भारी भूल है और कमजोरी भी।
ऐडी और नैन्सी अच्छे दोस्त बने । दोनों के कुछ हद तक पसंद भी एक जैसे ही थी।
साल दो साल की दोस्ती में कई बार साथ में लंबी ड्राइव पर गए, साथ डिनर करते रहे और इन्हीं बातों के बीच ऐडी ने उसे जीवन साथी बन जाने का प्रस्ताव भी दिया।
कुछ समय के लिए दोनों क्लब से गायब रहे। आदतन लोग कई अफ़वाहें उड़ाते रहे,कई मनगढ़ंत कहानियाँ क्लब में रंग जमाने लगीं और लोग उन सबका आनंद लेकर अपना मनोरंजन भी करने लगे।
इधर ऐडी नैन्सी को लंडन ले गया। वहाँ एक आलीशान मकान में रहने वाली तीस वर्षीय महिला मारिया से परिचय करवाया जो ऐडी की प्रेमिका लूसी की बेटी थी। लूसी विधवा और अत्यंत अमीर स्त्री थी जो ऐडी के पड़ोस में लंडन में रहती थी। ऐडी ने इस बेटी को एक सच्चे और अच्छे पिता का स्नेह दिया। लूसी ऐडी से उम्र में बहुत बड़ी थी। पर उसे ऐडी पर बहुत भरोसा था जिस कारण उसने अपनी संपत्ति का आधा हिस्सा ऐडी के नाम कर दिया था। उस धन से ऐडी ने खुद को एक सफल बिज़नेस मैन बना दिया। कुछ तीन चार साल पहले एक रोड एक्सीडेंट में लूसी की मौत हो गई। उसकी सारी संपत्ति उसकी बेटी को सौंपकर ऐडी भारत में आकर बस गया। ऐडी लूसी से बहुत प्रेम करता था पर उसकी अचानक मृत्यु होने पर ऐडी को भारी धक्का लगा था। ऐडी ने लूसी से शादी नहीं की थी पर वे बिसनेस पार्टनर थे ,लिव इन रिलेशनशिप था उनका। मारिया को पिता का भरपूर स्नेह मिला और विश्वास भी। पाश्चात्य सभ्यता के अनुसार उन दोनों के रिलेशनशिप समाज की नज़रों में जायज़ था।
ऐडी अपनी बेटी मारिया से नैन्सी का परिचय करवाने के लिए उसे लंडन लेकर गया था। नैन्सी ऐडी के बारे में सब कुछ जानती थी फिर भी उसे इस तरह लंडन लाकर सारी बातें स्पष्ट रूप से बताने और दिखाने पर नैन्सी के मन में ऐडी के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना जागृत हुई। मारिया से परिचित होकर नैन्सी को बहुत अच्छा लगा । उसकी सकारात्मक दृष्टिकोण, खुले विचार , मिलनसारिता और ऐडी के प्रति उसका स्नेह सब कुछ बहुत पारदर्शी था। नैन्सी को वह लूसी की जगह देना चाहता था यह जानकर वह भी प्रसन्न हुई।

ऐडी ने कुछ मित्रों को आमंत्रित किया, सारी व्यवस्था मारिया ने की और भारत लौटने से एक दिन पूर्व ऐडी ने नैन्सी को रिंग पहनाई !! शानदार पार्टी दी गई और दोनों भारत लौट आए। फिर शुरू हुआ एक और लिव-इन रिलेशनशिप का सिलसिला।
पर इस बार यह भारत में था। नैन्सी और ऐडी सिर्फ इस बात को जानते थे !
माह भर बाद दोनों फिर क्लब लौट आए , ऐडी ने सबसे कहा कि वह उसे अपना लाइफ पार्टनर बना चुके थे। लोगों ने पार्टी की माँग की तो वह भी दी गई। जो नैन्सी पर डोरे डालने के प्रयास में थे उनके दिल पर तो साँप लोट गया , मानो हाथ के तोते उड़ गए। वे महिलाएँ जो ऐडी पर फंदे कसने के चक्कर में थीं,उनका दिल टूट गया।
नैन्सी अब चमचमाती कार में ऐडी के साथ आती और देर रात दोनों साथ घर जाते।
ऐडी का जीवन भी बदल गया था। दोनों सुबह जिम जाते, साथ – साथ तैरते खुश दिखाई देते। मोहल्ले वाले भी उन्हें मिस्टर एंड मिसेस अवस्थी कहकर संबोधित करते। नैन्सी एक अच्छी लाइफ पार्टनर थी, सुगृहणी थी । उसने कभी ऐडी को परेशान होने या शिकायत का मौक़ा ही नहीं दिया। उसके ओंठों पर सदा जादुई मुस्कराहट रहती और तत्परता से हर काम को निपटाने की कला भी। हर सवाल का जवाब था उसके पास। ऐडी उससे बहुत खुश था। घर पर भी पार्टियाँ होती और नैन्सी बड़े उत्साह से सबका आयोजन करती ,एक सफल मेज़बान की भूमिका भी निभाती। लोग ऐडी को लकी मैन कहते और नैन्सी की प्रशंसा करते न थकते।
देखते – देखते ज़िंदगी के सुखद बीस वर्ष कट गए। इस बीच मारिया अपने बच्चों को लेकर दो – चार बार भारत आई , नैन्सी और ऐडी हर साल माह भर के लिए लंडन जाते रहे। मारिया के बच्चे नैन्सी को ग्रैनी पुकारते तो वह गद् गद् हो उठती। उसके मन के भीतर एक उथल पुथल – सा मच जाता। मारिया की चार संतानें थीं, नैन्सी ने एक बच्चे को गोद लेने की बात छेड़ी थी एक बार पर ऐडी ने जवाब में यही कहा कि गोद लेने की क्या ज़रूरत है ,हमारे ही बच्चे हैं वे , और नैन्सी तड़पकर रह गई थी।
नैन्सी अब त्रेसठ वर्ष की थीं और ऐडी पचहत्तर वर्ष का। लंडन से मारिया अपने जवान बच्चों के साथ मुंबई आई , पिता का पचहत्तरवाँ जन्मदिन मनाने का आयोजन किया गया। आलिशान होटल में बड़ी संख्या में मित्रों को आमंत्रित किया गया।
एक सफल शानदार पार्टी में मारिया ने ऐडी के गुणों का बखान किया और उसके ऐडी से कोई रिश्ता न होते हुए भी पिता की कमी न होने देने की बात सबके सामने रखी। उसके बच्चों ने ऐडी से जो नाना का स्नेह पाया उसका भी जिक्र किया। उपस्थित लोग ऐडी की महानता पर बहुत प्रसन्न हुए और उसकी खूब प्रशंसा की।

नैन्सी को सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था बस रह-रहकर दिल में एक टीस सी उठती थी कि काश ये सारे रिश्ते सच्चे और पक्के डोर से बँधे होते!!
दूसरे दिन सुबह नैन्सी बाथरूम गई ,जब बहुत देर तक वह नहीं लौटी तो ऐडी दरवाजा खटखटाने लगा पर नैन्सी ने कोई उत्तर नहीं दिया। मारिया और उसका पूरा परिवार तुरंत ऐडी के कमरे में पहुँचा, सभी समझ गए कि कुछ गड़बड़ है। फायरब्रिगेड को बुलाया गया , मुहल्ले के कुछ लोग भी आ गए। दरवाज़ा तोड़ा गया तो नैन्सी फ़र्श पर गिरी पड़ी थी और सिर से काफ़ी खून बह चुका था। नैन्सी सिवियर हार्ट फेल के कारण चल बसी थी। नैन्सी का अंतिम संस्कार हुआ , वह ईसाई धर्म को मानती थी अत: उसे दफनाया गया।
ऐडी इस उम्र में लाइफ पार्टनर को खोकर बिल्कुल टूट गए। मारिया के बच्चे लौट गए पर वह ऐडी के पास कुछ और दिन के लिए रुक गई।
एक दिन ऐडी ने नैन्सी के वॉर्डरोब की चाबी मारिया को देते हुए कहा कि नैन्सी शौकीन थी , उसके जो भी हीरे – मोती और अन्य जवाहरातों के गहने थे उन्हें वह ले जाए। मरियम ने अनिच्छा से अलमारी खोली तो वह हैरान रह गई ! अलमारी के बाएँ दरवाज़े पर असंख्य छोटे छोटे चिट्स लगे थे। सभी इंग्लिश में लिखे गए थे, उसके और ऐडी के बीच प्रगाढ़ प्रेम ज़रूर था पर लिव इन रिलेशनशिप के कारण नैन्सी के दिल में एक दर्द था, कई चिट्स पर माँ बनने का सौभाग्य न मिलने का दुख था। कई बच्चों के छोटे चित्र थे जिसके नीचे उसने लिखा था क्या तुम मेरी संतान बनोगे! चिट्स असंख्य थे पर भाव एक – मातृत्व की पूर्णता का अभाव, पत्नी का लिखित दर्ज़ा पाने का  अधूरा अरमान!!!
पाश्चात्य संस्कृति में शायद यह स्वीकृत संबंध हैं पर इस देश की नारी शायद आज भी विवाह के बंधन को महत्त्व देती हैं। मारिया ने सारे चिट्स एकत्रित कर ऐडी को दिए ,उन्हें पढ़कर वह हतप्रभ और अवाक रह गया।

नैन्सी को गुजरे अभी कुछ ही दिन हुए थे । मारिया के भी जाने का समय हो गया था। ऐडी मारिया को साथ लेकर कब्रिस्तान गया और एक सुंदर टूंबस्टोन लगा आया जिस पर लिखा था –
नैन्सी अवस्थी, वाइफ़ ऑफ ऐडी अवस्थी रेस्टस हियर ।
ऋता सिंह
22/2/18

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